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क्या तुम्हें याद है ? – Kafir

Romantic hindi poem

क्या तुम्हें याद है ? जब तुमने कहा था कि ” अब तुम्हारी बाहें जकड़ने लगी है मुझे “ और मैंने खोल दी थी अपनी बाहें हमेशा के लिए.! अब… फिर, जब की तुम्हें किसी के बाहों में सूकूं ना…
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