दिल का खेल: एक धोखेबाज से प्यार की दास्ताँ

मैं हमेशा से प्यार और रिश्तों में विश्वास रखने वालों में से रही हूँ। मुझे लगता था कि हर किसी को अपनी आत्मा का साथी मिलता है, एक ऐसा व्यक्ति जो उनका साथी, सबसे अच्छा दोस्त और उनकी दुनिया का अर्थ होगा। लेकिन जीवन ने मुझे चौंका दिया जब मुझे एहसास हुआ कि जिस आदमी को मैं अपना दिल दे बैठी थी, वह एक धोखेबाज था।

सूरज एक आकर्षक और आत्मविश्वासी व्यक्ति था। जब हम पहली बार मिले, तो वह बहुत मीठा और विचारशील था। उसने मुझे ऐसा महसूस कराया जैसे मैं दुनिया की सबसे खास महिला हूँ। मैं उसके प्यारे शब्दों और रोमांटिक इशारों में खो गई।

जैसे-जैसे हमारा रिश्ता गहराता गया, मैं और अधिक भोली होती गई। मैंने उस पर आँख मूँदकर भरोसा किया, यह सोचकर कि वह कभी भी मुझे चोट नहीं पहुँचा सकता। लेकिन एक दिन, सच्चाई मेरे सामने आ गई जैसे चमकती हुई बिजली।

मैंने गलती से उसके फोन पर एक मैसेज देखा जिससे उसके किसी और के साथ अफेयर का पता चला। मैं स्तब्ध रह गई, जैसे किसी ने मेरी धरती ही खींच ली हो। विश्वासघात का दर्द असहनीय था।

वह मेरे आँसुओं और मेरे गुस्से से अनदेखा रहा। उसने अपने कृत्य का बेशर्मी से बचाव किया, यह कहते हुए कि मैं बहुत अधिक भावुक थी और वह सिर्फ मस्ती कर रहा था। उसकी निर्लज्जता ने मुझे तोड़ दिया।

मैंने उसे तुरंत छोड़ दिया, यह जानते हुए कि मैं उस व्यक्ति के साथ नहीं रह सकती जो इतना बेईमान और क्रूर हो सकता है। लेकिन चोट गहरी थी। मुझे नींद आना मुश्किल होता था, मैं भूख नहीं खा पाती थी और मैं लगातार उदास रहती थी।

महीनों तक, मैं खुद को उसी दर्द और निराशा के चक्र में पाती रही। मुझे समझ नहीं आया कि मैं किसी ऐसे व्यक्ति से कैसे प्यार कर सकती हूँ जिसने मुझे इतनी गहराई से चोट पहुँचाई हो।

लेकिन समय के साथ, घाव भरने लगे। मैंने अपने आप को उन लोगों से घेरना शुरू कर दिया जो मुझसे प्यार करते थे और जिनकी मैं परवाह करती थी। मैंने अपनी ताकत को फिर से पाया और धीरे-धीरे उस भयानक अनुभव से आगे बढ़ी।

हालाँकि मुझे अभी भी उस धोखेबाज के साथ अपने अनुभव से निशान हैं, लेकिन मैं अब उसे अपनी पहचान नहीं बनने देती ।

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