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खुद से रूठ था और चल रहा था मैं – Raushan

Heart Touching Poem

खुद से रूठा था और चल रहा था मै. गिर गया था उसके दर पे और संभल रहा था मै. ख्वाहिशे थी कांच के जैसी कुछ इस कदर . धूल चेहरे पर थी और आईना बदल रहा था मै.!! उनकी…
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