Khushiyaan – Vishal Singh

पटना, एक बहुत ही शानदार शहर है, जो गंगा नदी के दक्षिणी तट पर अवस्थित है। इसकी वैभव की अगर बात की जाए तो 3-4 किताबें लिख दूँ मैं। बहुत चीजें ऐसी हैं यहां जो कहीं और नहीं। खैर मैं अपनी बातों पर आता हूँ…
(पटना के बारे में विशेष रूप से विकिपीडिया पर आप पढ़ सकते हैं।)

पटना का मौसम कुछ अजीब तरह का है। यहां गर्मी मार्च महीने से लेकर नवंबर महीने तक पड़ती है। ठंड की बात करूं तो यहां जनवरी में ही खास कर बहुत ठंड पड़ती है, ठंड ऐसी पड़ती है कि लोगों की क़मर तोड़ देती है।

पटना में तीन चीजें बहुत ज्यादा देखने को मिलेंगे…1. स्टूडेंट्स, 2. डॉटर्स, और 3. बॉयज-गर्ल्स हॉस्टल।
सुबह 6 बजे से 12 बजे तक तथा शाम में 4 बजे से रात को 10 बजे तक भयंकर जाम का सामना करना पड़ता है क्योंकि सारे स्टूडेंट्स इसी समय अपने स्कूल, कोचिंग्स को जाते-आते हैं।

मैं अब आपको एक घटना बताता हूँ जो मेरे साथ पिछले साल पटना में हुई थी।

मैं पटना में ही रहता हूँ तो अक्सर जाम से बचने के लिए हम स्टूडेंट्स गलियों से निकला करते हैं।

बात पिछली ठंड की है। सुबह 6.30 में मैं ओर मेरा दोस्त कोचिंग जाने के लिए होस्टल से निकलें। कुछ दूर जाने के बाद मुझे कुछ ज्यादा ही ठंड लगने लगी और मैंने अपने सिर को भी नही ढका था तो मेरी कानों में भी ठंड लगने लगी, अब मेरी हालत खराब होने लगी क्योंकि उस समय जनवरी का महीना चल रहा था। हवाएं भी तेज चल रहीं थीं।
फिर मैंने अपने दोस्त को अपनी हालत के बारे में बताया तो उसने कहा,”आगे कार्नर पर चाय की एक दुकान है, वहां चाय पी लो, फिर सारी ठंड भाग जाएगी.”

तो मैंने कहा,”ठीक है.” फिर हम वहां गए और चाय और बिस्किट ले ली..अब थोड़ी-थोड़ी ठंड जाने लगी थी, अब मैं रिलैक्स फील कर रहा था तभी अचानक मेरी नज़र रोड के दूसरे किनारे पर पड़ी। वहाँ 6-7 साल के कुछ बच्चे थे जो पहनावे से निम्न वर्ग या गरीब कह सकते हैं, उस तरह के लग रहे थे। उनका पहनावा देख कर मैं बिल्कुल ढंग रह गया। इतनी ठंड में उन्होंने कमर से ऊपर एक जैकेट ओर पैरों में हाफ पैंट पहन रखा था। सिर पे कुछ नहीं था। पैरों में चप्पल तक नहीं थे, उनके पैर और हाथ ठंड के मारे फुले हुएं थे। मुझे बहुत बुरा लग रहा था, तभी मेरी चाय खत्म हो गयी तो मैंने अपने घड़ी में सयम देखा तो अभी हमारे पास बहुत ज्यादा समय था तो फिर मैंने एक कप और चाय मंगा ली और पीने लगा।

फिर में उन बच्चों को देखने लगा। मैंने जो देखा उसे देख कर शायद आपलोगों के आंखों में आँसू आ जाएं।

“उन बच्चों के पास एक फटा हुआ पुराना बोरा था जो बिल्कुल गन्दा और मिट्टी में सना हुआ था। वे बच्चे उस बोरे से खेल रहे थे। उनका खेल भी बहुत अज़ीब तरह का था।
मैंने देखा उस बोर पर एक बच्चा बैठता तो आगे से दो बच्चे उस बोरे को खिंचते। पहले तो धीरे-धीरे खिंचते पर 30-40 सेकंड के बाद वो बहुत तेज़ी से उस बोरे को खिंचने लगते, और जैसे ही उनकी रफ्तार बढ़ती तो बोरे पर बैठा हुआ बच्चा पीछे की ओर लुढ़क जाता और लगभग वहां से 2-4 कदम दूर तक लुढ़कता हुआ चला जाता। इस घटना को घटते ही बाकी के बच्चे जोर-जोर से ताली बजा कर हस्ते हुए चिल्लाने लगते। उनकी आवाज बहुत तेज़ थी जो मैं रोड के दूसरे किनारे से स्पष्ट रूप से सुन सकता था। वे जोर-जोर से चिल्लाते ओर बोलते,”मज़ा आ जयितई, उ गिर गईलयी, अब उ बोरा पे ना बईठी, हा हा हा…..”
यही उनकी बातें थी…बस यही बातें वो दुहराते रहे। खेल का सिलसिला चलता रहा, एक के बाद दूसरा बैठता ओर गिरता, फिर उसके बाद दूसरा, उसके बाद तीसरा………….. ऐसे ही खेल बढ़ता रहा।”

इधर मेरी चाय और बिस्किट खत्म होने को थे, मैने घड़ी में समय देखा, 7.00 बज चुके थे, अब तो क्लास भी स्टार्ट हो गयी होगी…फिर हमने चाय के कप रखे और पैसे पेड कर के अपने कोचिंग की ओर तेजी से चल दिये.

….अब बस मेरे मन में एक ही बात चल रही थी…”गरीब दुनिया की छोटी-से-छोटी चीजों में भी खुशियाँ ढूंढ लेते हैं परन्तु अमीरों के पास दुनिया की हरेक खुशी होती है फिर भी उनके पास खुशी की कमी होती है।”

उस दृश्य ने मुझे झकझोर कर रख दिया।।

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5 Comments

  1. surander singh

    Comment…nice story

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  2. kritika

    so nice story

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  3. Alone girl

    Your right vishal

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  4. Prince

    Very Nice Love Story.

    Hey there! It’s me, Prince here. I feel myself so lonely because, I don’t have any friends. If Any Boy or Girl, Who needs A Good & Faithful Friend and Would like to Friendship with me? So, Please WhatsApp/Message me on +919199007192. Only Serious Persons are allowed, Arrogant People & Time-Passers Stay Away.

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  5. Nagma Khan

    U r right very heart 💓 touching story…

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