Poem

तेरे बिन तेरे संग-मृणाल -Mrinaal

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काश! भावनाओं की भी इक जुबान होती पल पल में वो हँसती , पल पल में वो रोती समझने वाले तो समझ जाते मौन की भाषा पर बेदर्द जमाने में आज बन गई हैं तमाशा। सुप्त हो रही संवेदनाओं का…
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